हर्रैया में खरीफ फसलों की सुरक्षा को लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू, 55 किसानों व कृषि कर्मियों ने लिया हिस्सा
एनपीएसएस ऐप, जैव कीटनाशक और एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की दी गई जानकारी, किसानों को वितरित किए गए जैव नियंत्रण कारक

हर्रैया, बस्ती। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय के अंतर्गत केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, गोरखपुर के तत्वावधान में खरीफ 2026-27 के तहत दो दिवसीय मानव संसाधन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 1 अक्टूबर 2026 को राजकीय मल्टीपरपज बीज गोदाम सभागार, हर्रैया, बस्ती में किया गया। कार्यक्रम में लगभग 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रगतिशील किसान तथा कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।
कार्यक्रम का उद्घाटन उप निदेशक कृषि रक्षा, बस्ती मंडल श्री चरण सिंह, जिला कृषि रक्षा अधिकारी बस्ती श्री रतन शंकर ओझा तथा केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, गोरखपुर के सहायक निदेशक श्री राहुल मिश्रा ने किया।
प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र की शुरुआत सहायक निदेशक राहुल मिश्रा ने केंद्र की विभिन्न गतिविधियों और एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) की अवधारणा एवं उपयोगिता की जानकारी देकर की। उप निदेशक कृषि रक्षा श्री चरण सिंह ने फसलों को कीटों एवं रोगों से बचाने के लिए विभिन्न प्रबंधन विधियों के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, जिला कृषि रक्षा अधिकारी श्री रतन शंकर ओझा ने किसानों की स्थानीय समस्याओं पर चर्चा करते हुए उनके समाधान से जुड़े पहलुओं को सामने रखा।
तकनीकी अधिकारी श्री मोनल कुमार सिंह ने एनपीएसएस (NPSS) ऐप के उपयोग, उसकी विशेषताओं और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को मोबाइल में ऐप डाउनलोड कराने के साथ इसके उपयोग की प्रक्रिया भी समझाई, ताकि किसान फसलों में लगने वाले कीटों एवं रोगों की पहचान और उनके प्रबंधन के लिए डिजिटल तकनीक का लाभ उठा सकें।
सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी (कीट) श्री अवधेश कुमार ने कृषि पारिस्थितिकी तंत्र, धान एवं सब्जियों में लगने वाले प्रमुख कीटों और रोगों के लक्षण तथा उनके प्रभावी प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। वहीं, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी श्री मनोज कुमार शुक्ला ने बीजोपचार के महत्व और जैव कीटनाशकों के उपयोग की जानकारी दी। आईपीएम स्टॉल के माध्यम से किसानों को विभिन्न विधियों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया।
सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी श्री रत्नेश कुमार मिश्रा ने कीट नियंत्रण की यांत्रिक विधियों के अंतर्गत पीले एवं नीले चिपचिपे प्रपंच, फेरोमोन प्रपंच, प्रकाश प्रपंच और फ्रूट फ्लाई प्रपंच की उपयोगिता समझाई। उन्होंने आईपीएम गीत के माध्यम से भी किसानों को एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन अपनाने के लाभों से परिचित कराया।
सुश्री श्वेता श्री ने कीटनाशकों के सुरक्षित एवं उचित उपयोग, फसलों में लगने वाले कीटों और रोगों के नियंत्रण तथा घरेलू स्तर पर अपनाए जा सकने वाले उपायों के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जैव नियंत्रण कारकों के रूप में ट्राइकोडर्मा और ब्यूवेरिया बेसियाना का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को फसल सुरक्षा की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक विधियों से परिचित कराना, रासायनिक कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करना तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री श्वेता श्री ने किया ।
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