जिस विकास भवन से बनती हैं विकास की योजनाएं, वहीं बदहाल शौचालय, स्वच्छ भारत मिशन पर सवाल

बस्ती। जिस विकास भवन से पूरे जिले के विकास की योजनाएं संचालित होती हैं, जहां मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी समेत करीब 26-27 सरकारी कार्यालय संचालित होते हैं और प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी व फरियादी पहुंचते हैं, उसी विकास भवन के भूतल पर बने शौचालय की बदहाल तस्वीर सरकारी व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
शौचालय की स्थिति ऐसी है कि यूरिनल टूटे पड़े हैं, पानी की व्यवस्था सुचारु नहीं है और वॉशबेसिन की पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त नजर आती है। यह महज एक शौचालय की बदहाली नहीं, बल्कि उस निगरानी व्यवस्था पर सवाल है जिसके जिम्मे सरकारी भवनों में आम लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
गौर करने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत देश में स्वच्छता और सुरक्षित सैनिटेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी। आधिकारिक तौर पर मिशन में शौचालयों के निर्माण के साथ उनके निरंतर उपयोग, स्वच्छता व्यवहार और बेहतर साफ-सफाई पर जोर दिया गया है।
लेकिन बस्ती के विकास भवन की तस्वीर इन दावों के सामने एक असहज सवाल खड़ा करती है—क्या स्वच्छता का संदेश केवल अभियानों और सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित है, या सरकारी कार्यालयों में भी इसकी जिम्मेदारी तय होगी?
शौचालय के ठीक बगल में खराब पड़ा वाटर कूलर
विडंबना यह भी है कि जिस शौचालय के रखरखाव की हालत खराब है, उसके ठीक बगल में लगा वाटर कूलर भी खराब पड़ा है। इसका उद्देश्य यहां आने वाले फरियादियों और कर्मचारियों को पीने का पानी उपलब्ध कराना था। ऐसे में दूर-दराज से अपनी शिकायतें लेकर आने वाले लोगों को बुनियादी पेयजल सुविधा तक उपलब्ध न होना व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है।
विकास भवन में रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होने का दावा किया जाता है। ऐसे में शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की नियमित जांच और मरम्मत कौन कराता है? किस अधिकारी या विभाग की जिम्मेदारी है? निरीक्षण कितनी बार होता है? और शिकायतों के बाद कार्रवाई क्यों नहीं होती? इन सवालों का जवाब जनता जानना चाहती है।
स्वच्छ भारत मिशन के आधिकारिक उद्देश्यों में स्वच्छता को सतत बनाए रखना और लोगों को सुरक्षित एवं स्वच्छ सैनिटेशन सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है।
ऐसे में जिले के प्रमुख प्रशासनिक भवन की यह स्थिति निश्चित तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों के लिए आईना है। अब देखना यह होगा कि तस्वीर सामने आने के बाद जिम्मेदार महज सफाई की खानापूर्ति करते हैं या विकास भवन के शौचालय और पेयजल व्यवस्था को वास्तव में दुरुस्त कराकर जवाबदेही भी तय करते हैं।
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